- 5 Unforgettable 90s Dance Stories Karisma Kapoor Revealed on India’s Best Dancer Season 5
- ज़रीन खान की स्टाइलिश मौजूदगी में लॉन्च हुआ X ब्लू जींस का विमेंस डेनिम कलेक्शन
- Zareen Khan Makes a Stylish Appearance at X Blue Jeans' Women's Denim Collection Launch
- रोहित आई हॉस्पिटल की चिकित्सा सेवा के 35 गौरवशाली वर्ष पूर्ण
- Dulquer Salmaan-Pooja Hegde to Prabhas-Triptii Dimri: 6 Exciting Fresh Duos to Watch Out For
नाबार्ड ने 28 नए उत्पादों के लिए जीआई पंजीकरण प्राप्त कर भारत की पारंपरिक विरासत और ग्रामीण उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाया
मुंबई: भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ सतत आजीविका के अवसर सृजित करने की अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए, नाबार्ड ने देशभर के 28 नए उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (जीआई) पंजीकरण दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब तक संस्था 176 उत्पादों को जीआई पंजीकरण प्राप्त कराने में सहयोग कर चुकी है।
जीआई पंजीकरण प्राप्त करने वाले इन नए उत्पादों में पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा वस्त्र, बांस शिल्प, धातु शिल्प, मिट्टी के बर्तन, चित्रकला तथा वाद्य यंत्रों सहित विविध श्रेणियाँ शामिल हैं। इससे भारत के क्षेत्र-विशिष्ट उत्पादों के पोर्टफोलियो को कानूनी संरक्षण मिलने के साथ-साथ वैश्विक बाजार में उनकी संभावनाओं को भी और अधिक मजबूती मिली है।
नव पंजीकृत उत्पादों में बिहार की नालंदा बावनबूटी साड़ी एवं वस्त्र तथा गया पत्थरकट्टी शिल्प, झारखंड की कुचाई सिल्क साड़ी एवं वस्त्र, असम के बा शिल्प (बांस शिल्प) और बिहू पेपा, हिमाचल प्रदेश का वुड कार्विंग शिल्प, तथा मध्य प्रदेश का खजुराहो धातु शिल्प सहित देशभर के कई अन्य पारंपरिक उत्पाद शामिल हैं।
इस उपलब्धि पर टिप्पणी करते हुए नाबार्ड के अध्यक्ष डॉ. शाजी कृष्णन वी. ने कहा, “भौगोलिक संकेतक (जीआई) पंजीकरण पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण, स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने और ग्रामीण उत्पादकों के लिए मूल्य सृजन का एक सशक्त माध्यम है। नाबार्ड उत्पादकों के सामूहिकीकरण, कौशल विकास, उद्यम संवर्धन, ब्रांडिंग, बाज़ार से जुड़ाव तथा निर्यात सुविधा के माध्यम से जीआई-आधारित मूल्य शृंखलाओं को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि भारत की विशिष्ट विरासत स्थायी आर्थिक अवसरों में परिवर्तित हो सके।”
नाबार्ड की जीआई-आधारित पहलों के माध्यम से 13,000 से अधिक कारीगरों और उत्पादकों को उच्च-मूल्य वाले घरेलू बाज़ारों से जोड़ा गया है, जिससे ग्रामीण आजीविका को मजबूती मिली है और पारंपरिक उत्पादों की व्यावसायिक संभावनाओं में वृद्धि हुई है। नाबार्ड द्वारा समर्थित जीआई मूल्य शृंखलाओं और उनसे जुड़े उद्यमों के माध्यम से अब तक 50,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए गए हैं।
वर्तमान में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक और गुजरात में विभिन्न जीआई उत्पादों के उत्पादन एवं संवर्धन के लिए कुल 14 ग्रामीण उद्यम उत्पादक संगठन (REPOs) कार्यरत हैं।
भौगोलिक संकेतक (जीआई) पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक सशक्त बनाने के लिए नाबार्ड ने उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआईआई), अहमदाबाद, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, बिहार तथा मदुरै एग्री बिजनेस इन्क्यूबेशन फोरम (एमएबीआईएफ), तमिलनाडु में जीआई सुविधा केंद्रों की स्थापना में सहयोग दिया है।
ये केंद्र जीआई पंजीकरण से लेकर पंजीकरण उपरांत गतिविधियों तक संपूर्ण सहायता प्रदान करते हैं, जिससे कारीगरों और उत्पादक समूहों को अपने विशिष्ट उत्पादों का संरक्षण, संवर्धन और व्यावसायीकरण करने में मदद मिलती है।
नाबार्ड ने कर्नाटक के ऐहोल में एक जीआई स्टोर की स्थापना में भी सहयोग दिया है, जिससे जीआई-प्रमाणित उत्पादों के प्रदर्शन और विपणन के लिए एक समर्पित मंच उपलब्ध हुआ है।
ब्रांडिंग, गुणवत्ता संवर्धन, डिजिटल वाणिज्य, बाज़ार से जुड़ाव तथा संस्थागत सुदृढ़ीकरण में निवेश के माध्यम से नाबार्ड पारंपरिक उत्पादों को प्रीमियम मूल्य दिलाने, सतत आजीविका के अवसर सृजित करने और भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इन पहलों का उद्देश्य बाज़ार तक पहुँच को बेहतर बनाना, उत्पादों की दृश्यता बढ़ाना तथा कारीगरों को उच्च-मूल्य वाले घरेलू और वैश्विक बाज़ारों तक पहुँच सुनिश्चित करना है।


